संदीप गोयल/ एस.के.एम. न्यूज़ सर्विस
देहरादून। देश की स्वतंत्रता के महान आंदोलन में अपना सर्वस्व न्योछावर कर भारत को अंग्रेजी दासता से मुक्त कराने वाले स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों और शहीदों का सम्मान करना प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व है। जिन महापुरुषों ने राष्ट्र की स्वतंत्रता के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया, वे आज भी देशवासियों के लिए प्रेरणास्रोत, पूजनीय एवं स्मरणीय हैं। उनके स्मारक महज पत्थर और भवन नहीं, बल्कि सेनानी परिवारों और देशवासियों के लिए पूजा स्थल के समान पवित्र हैं।
विकासखंड गरुड़, जनपद बागेश्वर में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्मारक के जीर्णोद्धार एवं सौंदर्यीकरण के चल रहे कार्य में कथित रूप से निम्न गुणवत्ता एवं अनियमितताओं को लेकर सेनानी परिवारों में गहरा रोष है।
अखिल भारतीय स्वतंत्रता सेनानी एवं शहीद परिवार कल्याण महा परिषद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अवधेश पन्त ने इस मामले पर गहरी चिंता एवं रोष व्यक्त करते हुए कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों के स्मारक केवल सरकारी निर्माण कार्य नहीं हैं, बल्कि देश की स्वतंत्रता के इतिहास और बलिदान की जीवंत धरोहर हैं। ऐसे पवित्र स्थलों के निर्माण एवं जीर्णोद्धार में किसी भी प्रकार की लापरवाही, अनियमितता अथवा घटिया सामग्री का प्रयोग स्वीकार नहीं किया जा सकता।
श्री पन्त ने बागेश्वर स्वतंत्रता सेनानी संगठन के जागरूक पदाधिकारियों की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने इस गंभीर विषय को प्रशासनिक अधिकारियों के संज्ञान में लाकर अपनी जिम्मेदारी का परिचय दिया है। उन्होंने कहा कि स्मारक निर्माण में गुणवत्ता के निर्धारित मानकों का पूरी तरह पालन होना चाहिए तथा संबंधित कार्यदायी संस्था को निर्माण कार्य की गुणवत्ता के प्रति जवाबदेह बनाया जाना आवश्यक है।
उन्होंने कार्यदायी संस्था को आगाह करते हुए कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों के इस महान मंदिर के निर्माण में किसी भी प्रकार की निम्न गुणवत्ता अथवा अनियमितता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आवश्यकता पड़ने पर निर्माण कार्य की उच्चस्तरीय जांच, गुणवत्ता परीक्षण तथा संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित कराने के लिए हर स्तर पर आवाज उठाई जाएगी।
अवधेश पन्त ने कहा कि इस पूरे मामले से जिलाधिकारी बागेश्वर एवं माननीय मुख्यमंत्री उत्तराखंड को पत्र के माध्यम से अवगत कराया जाएगा तथा स्मारक निर्माण कार्य की गुणवत्ता की निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों के विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई की मांग की जाएगी।
उन्होंने कहा कि देश के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने जिस भारत के निर्माण के लिए अपना सर्वस्व अर्पित किया, उनकी स्मृतियों से जुड़े स्मारकों का संरक्षण और सम्मान केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज का कर्तव्य है। सेनानी स्मारकों की गरिमा से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं होने दिया जाएगा।