मांगें पूरी न होने पर प्रदेशव्यापी कार्य बहिष्कार की चेतावनी

एस.के.एम. न्यूज़ सर्विस
देहरादून, 27 अक्टूबर। सीटू से संबद्ध उत्तराखंड आशा स्वास्थ्य कार्यकत्री यूनियन के आह्वान पर आज आशा कार्यकत्रियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर देहरादून में जोरदार प्रदर्शन करते हुए सचिवालय कूच किया। मुख्यमंत्री से प्रतिनिधि मंडल को मिलने के आश्वासन के साथ प्रदर्शन का समापन । आश्वासन मुख्यमंत्री के ओ.एस.डी भुवन चन्द जोशी व नगर मजिस्ट्रेट को दिया गया। सीटू राज्य सचिव लेखराज के नेतृत्व में आशाओं ने भरी हुंकार, गांधी पार्क से सचिवालय तक निकाला विशाल जुलूस, मुख्यमंत्री के नाम सौंपा सात सूत्रीय मांगपत्र।
कार्यक्रम की शुरुआत देहरादून के गांधी पार्क में आशा कार्यकत्रियों के एकत्रित होने के साथ हुई, जहां विशाल जनसभा आयोजित की गई। जनसभा में विभिन्न वक्ताओं ने आशाओं की समस्याओं, सरकार की वादाखिलाफी तथा लंबे समय से लंबित मांगों को प्रमुखता से उठाया। इसके उपरांत भारी संख्या में आशा कार्यकत्रियों ने नारेबाजी करते हुए गांधी पार्क से सचिवालय की ओर कूच किया। जनसभा को संबोधित करते हुए सीटू राज्य सचिव लेखराज ने कहा कि आशा कार्यकत्रियां प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ हैं, लेकिन सरकार लगातार उनके श्रम की उपेक्षा कर रही है। उन्होंने कहा कि 3 मार्च 2024 को मुख्यमंत्री द्वारा आशाओं के प्रतिनिधिमंडल को मानदेय बढ़ाने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन आज तक इस दिशा में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने सरकार से आशाओं को सम्मानजनक वेतन, कर्मचारी का दर्जा तथा सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने की मांग की। यूनियन की प्रांतीय अध्यक्ष शिवा दुबे, प्रांतीय कोषाध्यक्ष कलावती चंदोला, प्रांतीय महामंत्री लोकेश देवी तथा जिला अध्यक्ष सुनीता चौहान ने कहा कि आशाएं वर्षों से बेहद कम मानदेय पर स्वास्थ्य विभाग की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा रही हैं। लगातार बढ़ती महंगाई के बावजूद उनकी आर्थिक स्थिति में कोई उल्लेखनीय सुधार नहीं हुआ है। सीपीआई(एम) देहरादून के जिला सचिव तथा किसान नेता शिव प्रसाद देवली, सीटू देहरादून के जिला सचिव हिमांशु चौहान ने आंदोलन का समर्थन करते हुए कहा कि आशा कार्यकत्रियों का संघर्ष महिलाओं के श्रम के सम्मान, आर्थिक सुरक्षा और उनके अधिकारों का संघर्ष है। सरकार को उनकी न्यायोचित मांगों का तत्काल समाधान करना चाहिए।यूनियन ने चेतावनी दी कि यदि सरकार द्वारा मांगों पर शीघ्र सकारात्मक कार्रवाई नहीं की गई तो 11 नवंबर 2026 से प्रदेशभर की आशा कार्यकत्रियां कार्य बहिष्कार करेंगी। साथ ही 18, 19 एवं 20 नवंबर 2026 को सचिवालय पर आयोजित होने वाले सीटू के महापड़ाव में प्रदेशभर की आशाएं व्यापक भागीदारी करेंगी। वक्ताओं ने कहा कि आशाओं ने कोविड महामारी से लेकर मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, टीकाकरण और ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं तक हर क्षेत्र में अग्रिम पंक्ति में रहकर कार्य किया है। इसके बावजूद उन्हें आज तक उचित वेतन और सामाजिक सुरक्षा से वंचित रखा गया है। कार्यक्रम में सीटू, आशा यूनियन, वामपंथी दलों, विभिन्न जनसंगठनों के प्रतिनिधियों तथा भारी संख्या में आशा स्वास्थ्य कार्यकत्रियों ने भागीदारी की। इस आंदोलन का नेतृत्व सीटू राज्य सचिव लेखराज, आशा यूनियन की प्रांतीय अध्यक्ष शिवा दुबे, प्रांतीय कोषाध्यक्ष कलावती चंदोला, प्रांतीय महामंत्री लोकेश देवी, जिला अध्यक्ष सुनीता चौहान ने किया। आंदोलन को समर्थन देने वालों में सीपीआई(एम) देहरादून के जिला सचिव पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष शिव प्रसाद देवली , सीटू जिला सचिव हिमांशु चौहान रहे। इस अवसर पर अनीता थापा इस अनिता अग्रवाल, सरिता, सीमा शर्मा, पुष्पा खंडूरी, सुमनिता सेमवाल, बीना रावत, पुष्पा, गायत्री, नीलम, सीमा, मीनू, किरन, सोनी देवी, सावित्री देवी, प्रमिला देवी, सुमन देवी, ललिता रावल, कलावती, कमला रौथाण, चमन शर्मा, मधु गर्ग, नीरू जैन, प्रीति रस्तोगी, अनुराधा, स्नेहलता ऊषा, शिवकान्ता बेदी, किरण, साहिस्ता, बीना एवं नीलम ठाकुर सहित बड़ी संख्या में महिलाएँ उपस्थित रहीं।एवं उर्मिला रोड़ा सहित बड़ी संख्या में महिलाओं ने भागीदारी की। आंदोलन में उपस्थित महिलाओं ने अपनी मांगों को लेकर एकजुटता प्रदर्शित की तथा मांगों के समाधान के लिए संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया।
मुख्यमंत्री को सौंपे गए ज्ञापन में सात प्रमुख मांगें
1. आशा कार्यकत्रियों के वर्तमान तीन हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय एवं 10 प्रतिशत इंसेंटिव की व्यवस्था में सुधार करते हुए मानदेय एवं इंसेंटिव का भुगतान सीधे स्वास्थ्य विभाग से किया जाए।
2. 42 हजार रुपये वार्षिक प्रोत्साहन धनराशि के स्थान पर नियमित मासिक वेतन दिया जाए।
3. आशा कार्यकत्रियों को कर्मचारी भविष्य निधि एवं ईएसआई की सुविधाएं प्रदान की जाएं।
4. सेवानिवृत्ति पर पेंशन तथा पांच लाख रुपये का एकमुश्त भुगतान किया जाए एवं प्रत्येक केंद्र में आशाघर बनाए जाएं।
5. 46वें श्रम सम्मेलन की सिफारिशों को लागू करते हुए आशाओं को सामाजिक सुरक्षा प्रदान की जाए तथा उन्हें कर्मचारी घोषित किया जाए।
6. मुख्यमंत्री द्वारा 3 मार्च 2024 को मानदेय बढ़ोतरी का किया गया वादा पूरा किया जाए तथा गठित हाईपावर कमेटी की कार्रवाई सार्वजनिक की जाए।
7. चार श्रम संहिताओं के श्रमिक विरोधी प्रावधानों में संशोधन कर श्रमिक हितों में नियम बनाए जाएं। आशाओं के मानदेय में बढ़ोतरी करते हुए उन्हें राज्य कर्मचारी घोषित किया जाए।