सेनानी उत्तराधिकारियों ने अमर शहीद मदनलाल ढींगरा की पुण्यतिथि मनाई

बहराइच 17 अगस्त। आज स्थानीय सेनानी भवन सभागार में सेनानी उत्तराधिकारियों ने अमर शहीद मदनलाल ढींगरा की पुण्यतिथि मनाई। सेनानी उत्तराधिकारियों ने ढींगरा को स्वतंत्रता संग्राम का महान क्रांतिकारी बताया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए संगठन संरक्षक एवं पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष अनिल त्रिपाठी ने कहा कि मदनलाल ढींगरा का जन्म 18 सितंबर 1883 को पंजाब के अमृतसर में हुआ था, उनके पिता डा. दित्तामल ढींगरा ब्रिटिश शासन में सिविल सर्जन थे, और अंग्रेजों के वफादार माने जाते थे। एक सम्पन्न और अंग्रेजों के वफादार परिवार में जन्म लेने के बावजूद मदनलाल ढींगरा शुरूआती समय से ही देश की आजादी के लिए समर्पित थे। लाहौर के गवर्नमेंट कॉलेज से पढ़ाई के दौरान राष्ट्रवादी गतिविधियों में भाग लेने के कारण उन्हें कालेज से निकाल दिया गया था। उच्च शिक्षा के लिए वे लंदन गये, और मैकैनिकल इंजीनियरिंग में दाखिला लिया। अखिल भारतीय स्वतंत्रता सेनानी उत्तराधिकारी संगठन राज्य इकाई उत्तर प्रदेश के कार्यवाहक महामंत्री रमेश कुमार मिश्र ने कहा कि लंदन में वीर सावरकर और श्यामजी कृष्ण वर्मा के सम्पर्क में आये और ‘इंडियाहाउस’ से जुड़े।01 जुलाई 1909 को इंपीरियल इंस्टीट्यूट लंदन में उन्होंने ब्रिटिश राज्य के दमनकारी नीतियों का बदला लेने के लिए कर्जन वायली को गोली मारी। अदालत में मदनलाल ढींगरा ने ब्रिटिश न्याय प्रणाली को मानने से इंकार किया और कहा कि मातृभूमि की रक्षा के लिए जान देना उनका गर्व है,इस देश भक्ति की कार्य के लिए उन्हें मात्र 24 वर्ष की आयु में 17 अगस्त 1909 को लंदन के पेंटोनविले जेल में फांसी दे दी गई। इस हत्या के दौरान बीच-बचाव करने वाले एक पारसी डाक्टर कावासजी लालकाका की भी मृत्यु हो गई थी। फांसी के समय उन्होंने कहा कि “ईश्वर से मेरी एक मात्र प्रार्थना है कि मैं भारत मां के संरक्षण में पुनर्जन्म लूं और उसकी स्वतंत्रता के उद्देश्य के लिए तब तक पुनर्जन्म लेता रहूं जब-तक हमारा उद्देश्य पूर्ण न हो जाए, वन्देमातरम्”सेनानी उत्तराधिकारियों ने मदनलाल ढींगरा के अदम्य साहस और देश भक्ति की प्रशंसा की और भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कार्यक्रम समाप्त किया।