देहरादून 20 अप्रैल। आज उत्तराखण्ड आंदोलनकारी संयुक्त परिषद के प्रतिनिधिमंडल ने आज राज्य आन्दोलन के चिन्हिकरण से छूटे आंदोलनकारियों की समस्या सचिव गृह, सचिव मुख्यमंत्री शैलेश बगोली के समक्ष रखी तथा कहा है कि आज भी चिन्हीकरण से बडी संख्या में वंचित हैं। सचिव गृह एवं मुख्यमंत्री शैलेश बगोली के प्रतिनिधियों के साथ इस मुद्दे पर गंभीर वार्ता हुई।
प्रतिनिधिमंडल ने साफ किया कि रिकॉर्ड नष्ट होने, पुराने दस्तावेजों के अभाव और सरकारी शिथिलता के कारण अनेक आंदोलनकारियों की अनदेखी किए गये हैं जबकि वे इस आन्दोलन की मुख्य भूमिका में रहे हैं,परिषद ने मांग की कि अखबार की कतरनों, वरिष्ठ आंदोलनकारियों के सत्यापन और पुराने आवेदनों को भी मान्यता देते हुए उचित एवं तर्कसंगत मापदंड बनाए जाएं।
वार्ता के दौरान सचिव गृह ने संज्ञान लेते हुए स्पष्ट आश्वासन दिया कि “चिन्हीकरण की प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की शिथिलता नहीं बरती जाएगी। हर हाल में आंदोलनकारियों के साथ न्याय किया जाएगा।”उन्होंने यह भी कहा कि शासन पूरी गंभीरता से छूटे हुए आंदोलनकारियों के चिन्हीकरण के लिए जल्द ही स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करेगा, ताकि वर्षों से लंबित इस मामले का सम्मानजनक हल निकाला जा सके। प्रतिनिधिमण्डल ने सरकार के इस सकारात्मक रुख का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई कि अब जल्द ही हर उस आन्दोलनकारी को उसका उचित स्थान मिलेगा, जिसने उत्तराखंड राज्य के लिए अपना संघर्ष किया। इस अवसर पर नवनीत गुंसाई, अनन्त आकाश, अमित परमार, मीरा, देवेश्वरी, विकास रावत, जगमोहन, पारूल आदि मौजूद थे।