देहरादून। पुराने समय में सिनेमाघरों के बाहर या इंटरवल (मध्यंतर) के दौरान एक-एक आने (एक आना) में मिलने वाली फिल्मी गानों की छोटी पुस्तिकाएं बिकती थीं। दर्शक इन्हें खरीदकर अपने पास रख लेते थे ताकि घर जाकर फिल्म के गानों को गुनगुना सकें। ये छोटी किताबें आमतौर पर एक आना या कुछ पैसों की होती थीं जो थिएटर के बाहर आसानी से मिल जाती थीं। इनमें हाल ही में देखी गई फिल्म के सभी लोकप्रिय गानों के बोल छापे जाते थे। कई बार लोग हिंदी गानों को अपनी स्थानीय भाषा में भी इन किताबों के जरिए पढ़ते व समझते थे। उस दौर के शौकीन लोग इन पुस्तिकाओं को संभालकर एक यादगारी के रूप में अपने पास रखते थे।