सुरों की अमर साधिका आशा भोसले ने दुनिया को कह दिया अलविदा, आशा ताई के निधन से इंडस्ट्री में शोक

नई दिल्ली। मशहूर गायिका आशा भोसले हमारे बीच नहीं रहीं। 92 साल की उम्र में उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया है। करीब सात दशक तक सिनेमाई दुनिया में अपनी सुरीली आवाज का जादू चलाने वाली गायिका को कल शनिवार को तबीयत खराब होने के चलते अस्पताल में भर्ती कराया गया था। मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में इमरजेंसी मेडिकल सर्विसेज यूनिट में उनका उपचार चल रहा था। दुनियाभर के फैंस दुआएं कर रहे थे। मगर, रविवार को गायिका ने दुनिया को अलविदा कह दिया। आशा भोसले का अंतिम संस्कार कल सोमवार को होगा। गायिका का पार्थिव शरीर सुबह 11 बजे लोअर परेल में उनके घर पर अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा। शाम 4 बजे दादर के शिवाजी पार्क में उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। यही वही जगह है, जहां उनकी बहन लता मंगेशकर का भी अंतिम संस्कार हुआ था। 8 सितंबर 1933 को आशा भोसले का जन्म एक संगीत से जुड़े परिवार में हुआ था। उनके पिता पंडित दीनानाथ मंगेशकर एक एक्टर और क्लासिकल सिंगर थे। आशा भोसले स्वर कोकिला लता मंगेशकर की छोटी बहन थीं। आशा भोसले जब नौ साल की थीं, तभी उनके पिता का निधन हो गया था। इसके बाद उनकी फैमिली पुणे से कोल्हापुर और बाद में मुंबई आ गई। बड़ी बहन लता मंगेशकर के पद्चिन्हों पर चलते हुए वह भी संगीत की दुनिया में आईं। आशा भोसले ने पहला गीत मराठी फिल्म ‘माझा बाल’ (1943) में ‘चला चला नाव वाला’ गाया था। जबकि बॉलीवुड में उनका पहला गाना ‘चुनरिया (1948)’ फिल्म में ‘सावन आया’ था। यहां से शुरू हुआ संगीत और गीतों का सफर पांच दशक से ज्यादा समय तक चला और आशा भोसले देखते-देखते भारतीय संगीत की दिग्गजों में शामिल हो गईं।
तमाम फिल्मी गानों को अपनी मखमली आवाज से सजाने वाली दिग्गज गायिका आशा भोसले नहीं रहीं। उन्होंने 92 साल की उम्र में आज रविवार को दुनिया को अलविदा कह दिया है। गायिका का जाना सिनेमा के लिए एक बड़ी क्षति है। उनका अंतिम संस्कार कल सोमवार को होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट करते हुए गायिका आशा भोसले के निधन पर शोक व्यक्त किया है। वह लिखते हैं, ‘भारत की सबसे जानी-मानी और बहुमुखी आवाजों में से एक, श्रीमती आशा भोसले जी के निधन से मुझे गहरा दुख हुआ है। दशकों तक फैली उनकी अनोखी संगीत यात्रा ने हमारी सांस्कृतिक विरासत को समृद्ध किया है और दुनिया भर में अनगिनत लोगों के दिलों को छुआ है। दिल को छू लेने वाली धुनों से लेकर जोशीली रचनाओं तक, उनकी आवाज में एक कालातीत चमक थी। उनके साथ हुई बातचीत की यादों को मैं हमेशा संजोकर रखूंगा। उनके परिवार, प्रशंसकों और संगीत प्रेमियों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं। वह आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेंगी, और उनके गीत हमेशा लोगों के जीवन में गूंजते रहेंगे।’ आशा भोसले के निधन पर हेमा मालिनी ने इंस्टाग्राम पोस्ट साझा कर श्रद्धांजलि दी है। उन्होंने लिखा है, ‘आशा ताई अब नहीं रहीं! मुझे तो यकीन ही नहीं हो रहा कि कोई इतनी जिंदादिल इंसान, जिसने अपने गानों में इतनी जान और अंदाज भर दिया था, हमें यूं अकेला छोड़कर चली गईं। यह मेरे लिए खासकर बहुत मुश्किल है, क्योंकि आशा जी के साथ मेरा एक गहरा जज्बाती जुड़ाव था। उन्होंने अपनी अनोखी आवाज और अंदाज से मेरे कई गानों को बेहद मशहूर बना दिया था। लता जी और आशा जी, दोनों के साथ मेरा बहुत ही खास रिश्ता था। फिल्म इंडस्ट्री में मेरी कामयाबी में उन दोनों का योगदान बहुत बड़ा रहा है’। आशा भोसले के निधन पर एआर रहमान ने इंस्टाग्राम पोस्ट साझा कर श्रद्धांजलि दी है। उ्न्होंने लिखा है, ‘वे अपनी आवाज और आभा के जरिए हमेशा जीवित रहेंगी। क्या कमाल की कलाकार थीं’। अभिनेता अक्षय कुमार ने आशा भोसले के साथ सोशल मीडिया पर एक फोटो साझा करते हुए श्रद्धांजलि दी है। उन्होंने लिखा है, ‘उनकी सुरीली आवाज हमेशा अमर रहेगी’।
सिंगर जुबीन नौटियाल ने आशा भोसले के निधन पर श्रद्धांजलि दी है। उन्होंने इंस्टाग्राम पोस्ट साझा कर लिखा है, ‘वो आवाज, जिसने कभी खामोशी को रूह में बदल दिया था, अब खुद खामोशी बन गई है। आशा भोसले के गुजर जाने से, दुनिया ने सिर्फ एक गायिका को ही नहीं खोया है, बल्कि एक दौर, एक एहसास और एक ऐसी धड़कन को खो दिया है, जो लाखों गीतों के भीतर धड़कती थी। उनकी आवाज सिर्फ सुनी ही नहीं जाती थी, बल्कि उसे महसूस किया जाता था। दिल टूटने पर, प्यार में, तड़प में और जश्न के मौकों पर। कई पीढ़ियां सिर्फ उन्हें सुनकर ही बड़ी नहीं हुईं, बल्कि उनके गीतों के जरिए भावनाओं को महसूस करते हुए बड़ी हुईं। संगीत की शाश्वत गोद में उन्हें शांति मिले। परिवार के लिए प्रार्थनाएं। हर हर महादेव’।
भारत की स्वर कोकिला, सुरों की अमर साधिका आशा भोसले के देवलोक गमन के समाचार ने हृदय को गहरे शोक से भर दिया है। आशा ताई का जाना एक महान गायिका का जाना नहीं, बल्कि भारतीय संगीत के एक स्वर्णिम युग का अवसान है। आशा ने अपने अद्वितीय स्वर, अप्रतिम ऊर्जा और बहुमुखी प्रतिभा से संगीत जगत को नई ऊँचाइयाँ दीं। उन्होंने हजारों गीतों को अपनी आवाज़ दी, चाहे वह शास्त्रीयता से परिपूर्ण रचनाएँ हों, चुलबुले फिल्मी गीत, ग़ज़लें, भजन या पॉप संगीत। हर शैली में उन्होंने अपनी अलग छाप छोड़ी। छह दशकों से अधिक के अपने लंबे करियर में उन्होंने अनगिनत पुरस्कार और सम्मान प्राप्त किए, जिनमें पद्म विभूषण जैसे सर्वोच्च नागरिक सम्मान भी शामिल हैं। उनकी आवाज़ में केवल सुर नहीं थे, बल्कि भावनाओं का सागर था—प्रेम, विरह, उल्लास और वेदना सब कुछ उनकी गायकी में जीवंत हो उठता था। आने वाली पीढ़ियों के लिए वे प्रेरणा का स्रोत थीं और रहेंगी। ईश्वर से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें और उनके परिवार व असंख्य प्रशंसकों को यह अपार दुःख सहने की शक्ति दें। आशा जी भले ही आज हमारे बीच न हों, पर उनके गीत सदैव हमारे हृदयों में गूंजते रहेंगे।