राजधानी दून में आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों एवं सहायिकाओं का प्रदर्शन, निकाला जुलूस

एस.के.एम. न्यूज़ सर्विस
देहरादून, 16 सितम्बर। आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों एवं सहायिकाओं की विभिन्न जायज मांगों को लेकर सीटू से संबद्ध आंगनबाड़ी कार्यकत्री, सेविका कर्मचारी यूनियन के आह्वान पर आज राजधानी देहरादून मे प्रदर्शन किया गया, तथा जुलूस निकालकर मुख्याल मे प्रदर्शन करते हुये जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा गया। प्रदर्शन की शुरुआत गांधी पार्क में आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों एवं सहायिकाओं के एकत्रित होने के साथ हुई। गांधी पार्क में सभा आयोजित की गई, जिसमें वक्ताओं ने आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों एवं सहायिकाओं की लंबित मांगों तथा सरकार द्वारा पूर्व में किए गए आश्वासनों को पूरा न किए जाने पर रोष व्यक्त किया। इसके बाद यूनियन के प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी देहरादून के माध्यम से मुख्यमंत्री उत्तराखंड को ज्ञापन प्रेषित किया।
ज्ञापन में मांग की गई कि मार्च 2024 के आंदोलन के दौरान सरकार द्वारा दिए गए आश्वासन के अनुसार आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों एवं सहायिकाओं का मानदेय शीघ्र बढ़ाया जाए। आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों एवं सहायिकाओं को राज्य कर्मचारी घोषित कर न्यूनतम 26,000 मानदेय दिया जाए। सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार ग्रेच्युटी एवं सामाजिक सुरक्षा का लाभ आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों एवं सहायिकाओं को दिया जाए। केंद्र सरकार के शासनादेश के अनुसार आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों एवं सहायिकाओं को 45 दिन के मातृत्व अवकाश का लाभ उत्तराखंड में भी दिया जाए। आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों एवं सहायिकाओं को वर्ष में 20 दिन का आकस्मिक अवकाश दिया जाता है। बीमारी के कारण अवकाश लेने पर 20 दिन की सीमा समाप्त होने के बाद अतिरिक्त 10 दिन का मानदेय सहित चिकित्सा अवकाश दिया जाए। आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों से बाल विकास विभाग के अतिरिक्त अन्य विभागों का कार्य न कराया जाए। यदि अन्य विभागों का कार्य कराया जाता है तो उसके लिए अतिरिक्त मानदेय दिया जाए। आंगनबाड़ी केंद्रों का किराया मकान मालिक के खाते में न डालकर माता समिति अथवा आंगनबाड़ी कार्यकत्री के खाते में दिया जाए। विभाग द्वारा आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए पंजीकरण की व्यवस्था पुनः शुरू की जाए। पिछले लगभग 5 वर्षों से पंजीकरण बंद होने के कारण कार्यकत्रियों को अपने खर्च से पंजीकरण कराना पड़ रहा है, जिससे उन पर अतिरिक्त आर्थिक भार पड़ रहा है। आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को स्कूलों की तर्ज पर ग्रीष्मकालीन एवं शीतकालीन अवकाश दिया जाए तथा संबंधित शासनादेश लागू किया जाए। दूसरे आंगनबाड़ी केंद्र पर स्टे लगने अथवा अतिरिक्त केंद्र का कार्य करने वाली कार्यकत्रियों को अतिरिक्त कार्य के लिए अतिरिक्त मानदेय दिया जाए। यूनियन ने कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां एवं सहायिकाएं सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं को जमीनी स्तर तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। इसके बावजूद उन्हें पर्याप्त मानदेय, सामाजिक सुरक्षा एवं अन्य जरूरी सुविधाओं से वंचित रखा जा रहा है। यूनियन ने मुख्यमंत्री से मांग की कि सभी मांगों पर तत्काल सकारात्मक निर्णय लेते हुए आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों एवं सहायिकाओं की समस्याओं का समाधान किया जाए। इससे पूर्व निदेशक आई.सी. डी.एस. ने यूनियन के प्रतिनिधियों को वार्ता हेतु बुलाया गया इस अवसर पर यूनियन के पदाधिकारियों की मांग पर राशन कार्डों के सत्यापन का काम न करने के निर्देश दिये एवं रजिस्टर व अन्य सामग्री लेने के लिए वर्ष में 2000/रुपये आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों को देने की के आदेश दिए।
इस अवसर पर सीटू के जिला महामंत्री लेखराज, जिला अध्यक्ष एस.एस. नेगी, सचिव हिमांशु चौहान, बस्ती बचाओ आंदोलन के संयोजक अनंत आकाश, आशा स्वास्थ्य कार्यकत्री कर्मचारी यूनियन की प्रांतीय अध्यक्ष, शिवा दुबे, चित्रकला, लक्ष्मी पंत, ज्योतिका पांडे, रजनी गुलेरिया आदि ने विचार रखे। इस अवसर पर सुनीता रावत, मनीषा राणा, ऊषा भंडारी, सीमा सिंह, आशा नेगी, शीला बहुगुणा, पूनम सिंह, अंजली, सोमबाला, कलावती चंदोला, रजनी, अनुराधा, आशा गुरूंग, अमिता, गीता पाल, ललिता, पुष्पा चौधरी, कलावती, पूनम अनुराधा, विनीता, योगिता, आदि बड़ी संख्या में आंगनवाड़ी कार्यकत्री व सेविकाये शामिल थीं।