नई दिल्ली। केंद्रीय वस्त्र मंत्री श्री गिरिराज सिंह ने आज प्रौद्योगिकी उन्नयन, संस्थागत सुधारों एवं उद्योग को बेहतर समर्थन द्वारा भारत के वस्त्र पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से चल रही प्रमुख पहलों की प्रगति का आकलन करने करने के लिए एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में वस्त्र मंत्रालय की सचिव, श्रीमती नीलम शमी राव, वस्त्र आयुक्त, श्रीमती वृंदा मनोहर देसाई तथा वस्त्र मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया। केंद्रीय वस्त्र मंत्री ने पूर्ववर्ती पावरलूम सेवा केंद्रों को एकीकृत वस्त्र एवं परिधान विकास केंद्रों (आईटीएडीसी) में परिवर्तित करने वाले कार्यों की समीक्षा की जिन्हें वस्त्र क्षेत्र के लिए एकीकृत विकास केंद्रों के रूप में पुनर्स्थापित किया जा रहा है। पुनर्गठित आईटीएडीसी की परिकल्पना ऐसे वन-स्टॉप सुविधा केंद्रों के रूप में की गई है, जो वस्त्र उद्यमियों, एमएसएमई तथा वस्त्र मूल्य श्रृंखला से जुड़े अन्य हितधारकों को कौशल विकास, परीक्षण सहायता, डिज़ाइन सहायता, प्रौद्योगिकी, उद्यमिता विकास, ऋण सुविधा, निर्यात संवर्धन एवं बाज़ार संपर्क जैसी सेवाएं प्रदान करेंगे। श्री गिरिराज सिंह ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में आईटीएडीसी के प्रदर्शन की समीक्षा करते हुए उनकी गतिविधियों में हुए उल्लेखनीय विस्तार की सराहना की। तिमाही के दौरान, इन केंद्रों ने 1,170 से अधिक प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षण दिया, जनसंपर्क कार्यक्रमों के माध्यम से लगभग 1,770 वस्त्र इकाइयों तक पहुंच बनाया, संस्थागत ऋण सुविधा उपलब्ध कराने में सहायता की, ई-कॉमर्स से जुड़ाव को मजबूत किया, उत्पाद-आधारित उद्यमिता पहलों की शुरुआत की और बांस, भांग, पटसन, केले तथा अनानास जैसे नए युग के रेशों के व्यावसायीकरण को बढ़ावा दिया। उन्होंने कहा कि आईटीएडीसी निरंतर ऐसे नवाचार एवं उद्यम विकास केंद्रों के रूप में विकसित हो रहे हैं जो वस्त्र व्यवसायों को इनक्यूबेशन से लेकर बाज़ार विस्तार तक के सभी चरणों में समर्थन देने में सक्षम हैं। मंत्री ने संशोधित प्रौद्योगिकी उन्नयन निधि योजना (एटीयूएफएस) के कार्यान्वयन की भी समीक्षा की और भारतीय वस्त्र उद्योग के आधुनिकीकरण में इसके योगदान की सराहना की। तृतीय-पक्ष द्वारा स्वतंत्र रुप से इसके प्रभाव का आकलन किया गया जिसके अनुसार, एटीयूएफएस के अंतर्गत 2,776 करोड़ रुपये की सब्सिडी सहायता के साथ 10,061 इकाइयों को समर्थन प्रदान किया गया है, जिससे 53,121 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश प्राप्त हुआ है। इस योजना के माध्यम से लगभग 6.7 लाख बेंचमार्क वस्त्र मशीनों लगाने में मदद मिली है तथा लगभग 3.6 लाख प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित हुए हैं।
अध्ययन ने इस योजना के मजबूत गुणक प्रभाव को रेखांकित किया। इसके अनुसार, सब्सिडी के प्रत्येक एक करोड़ रुपये से लगभग 19 करोड़ रुपये का निजी निवेश प्राप्त हुआ तथा लगभग 130 प्रत्यक्ष रोजगार सृजित हुए। अध्ययन से यह भी पता चला कि कुल सब्सिडी का 46 प्रतिशत बुनाई क्षेत्र से प्राप्त हुआ जबकि समेकित इकाइयों में सृजित नए रोजगारों का 46 प्रतिशत लगभग 1.7 लाख नौकरियों के बराबर था। यह योजना के प्रौद्योगिकी उन्नयन, उत्पादकता वृद्धि एवं रोजगार सृजन में महत्वपूर्ण योगदान को दर्शाता है। केंद्रीय मंत्री ने वस्त्र आयुक्त कार्यालय की पुनर्निर्मित वेबसाइट का उद्घाटन किया। इस वेबसाइट का इंटरफ़ेस आधुनिक, आसानी से काम करने वाला और यूज़र-फ्रेंडली है, जिसमें योजनाओं, सेवाओं और संस्थागत गतिविधियों के बारे में पूरी जानकारी दी गई है। वेबसाइट में आईटीएडीसी और पावरलूम क्लस्टरों के इंटरैक्टिव मैप, बेहतर अभिगम्यता सुविधाएं तथा वस्त्र मंत्रालय की डिजिटल पहचान के अनुरूप एक समान डिज़ाइन भी शामिल है। श्री गिरिराज सिंह ने आईटीएडीसी की विकसित हो रही भूमिका पर कहा कि एकीकृत वस्त्र एवं परिधान विकास केंद्र देश के वस्त्र क्षेत्र के विकास के अगले चरण की आधारशिला बनेंगे और उद्यमियों तथा उद्योग के लिए एकल-खिड़की सुविधा केंद्र के रूप में कार्य करेंगे। कौशल विकास, परीक्षण, प्रौद्योगिकी सहायता, ऋण सुविधा, नवाचार एवं बाज़ार से जुड़ाव के माध्यम से ये केंद्र एमएसएमई को सशक्त बनाएंगे, निर्यात को बढ़ावा देंगे, सतत रोजगार सृजित करेंगे तथा वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी एवं आत्मनिर्भर वस्त्र क्षेत्र के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देंगे। श्रीमती नीलम शमी राव, सचिव, वस्त्र मंत्रालय ने संस्थागत अभिसरण के महत्व पर बल देते हुए कहा कि क्षेत्रीय इकाइयों, वस्त्र समिति, निर्यात संवर्धन परिषदों, वस्त्र अनुसंधान संघों तथा उद्योग संघों को सरकारी पहलों के प्रभाव को अधिकतम करने के लिए आपसी घनिष्ठ समन्वय के साथ काम करना चाहिए। संस्थागत अभिसरण से वस्त्र मूल्य शृंखला में पहुमच, सेवा वितरण एवं योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में सुधार होगा। मंत्री ने आईटीएडीसी के लिए नव विकसित प्रमुख प्रदर्शन संकेतक (केपीआई) पोर्टल का भी उद्घाटन किया। पोर्टल क्षेत्र-स्तरीय डेटा संकलन, प्रदर्शन बेंचमार्किंग, डिजिटल डैशबोर्ड तथा व्यवस्थित समीक्षा तंत्र के माध्यम से संस्थागत प्रदर्शन की वास्तविक समय में निगरानी को सक्षम बनाता है, जिससे देशभर के आईटीएडीसी में सुशासन, पारदर्शिता एवं सेवा वितरण को सुदृढ़ किया जा सके। केंद्रीय मंत्री ने सभी क्षेत्रीय कार्यालयों को निर्देश दिया कि वे सरकारी पहलों के प्रभावी क्रियान्वयन तथा वस्त्र उद्यमों तक अधिक व्यापक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए वस्त्र समिति, निर्यात संवर्धन परिषदों, वस्त्र अनुसंधान संघों, राज्य सरकारों और उद्योग संघों के साथ निकट समन्वय में कार्य करें। बैठक का समापन मंत्रालय की प्रतिबद्धता की पुनर्पुष्टि के साथ हुआ कि वह संस्थागत समर्थन को सुदृढ़ करेगा, प्रौद्योगिकी उन्नयन में तेजी लाएगा, उद्यमिता को बढ़ावा देगा तथा और एक ऐसा वस्त्र क्षेत्र तैयार करेगा जो वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी हो, नवाचार पर आधारित हो और जिसमें रोजगार के भरपूर अवसर हों।