वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. कुसुम रानी नैथानी ने छात्र छात्राओं को लेखन की बारीकियां भी समझाई

एस.के.एम. न्यूज़ सर्विस
देहरादून। आज बाल दिवस की पूर्व संध्या पर स्वयं संस्था की ओर से बाल कवि सम्मेलन का ऑनलाइन आयोजन किया गया। इसमें पौड़ी, टिहरी, चमोली, हरिद्वार, अल्मोड़ा, उधम सिंह नगर, देहरादून, रुद्रप्रयाग आदि जनपदों के लगभग चालीस छात्र छात्राओं ने प्रतिभाग किया। उन्होंने अपनी कविताओं के माध्यम से आज की ज्वलंत समस्याओं जैसे पर्यावरण, स्वच्छता, बालिका शिक्षा, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, वृक्षारोपण आदि विषयों पर अपनी रचनाओं की सुंदर प्रस्तुति दी। कुमारी मीना की कविता ‘वन और हम’ कविता को सभी के द्वारा बहुत सराहा गया। इसके अलावा कु० प्रेरणा की कविता ‘मैं बेटी हूं’ एवं कु० दिव्या की प्रस्तुति ‘ उत्तराखंड राज्य हमारा ‘ कविता को भी पसंद किया गया। संस्था की उपाध्यक्षा श्रीमती मंजू सक्सेना एवं उपस्थिति गणमान्य व्यक्तियों के द्वारा बच्चों की सुंदर प्रस्तुति की सराहना की है। श्रीमती मंजू सक्सेना ने बताया कि स्वयं संस्था विगत बीस वर्षों से लगातार छात्र छात्राओं ने अंदर कल्पनाशीलता को विकसित करने के लिए प्रयास कर रही है। यह बालकवि सम्मेलन उसी की एक कड़ी है। इस अवसर पर बाल साहित्य की वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. कुसुम रानी नैथानी ने छात्र छात्राओं को लेखन की बारीकियां भी समझाई। उन्होंने कहा कि लेखन में कल्पनाशीलता का होना अति आवश्यक है। लेखन क्षेत्र में सफलता पाने के लिए अच्छे भावों एवं सार्थक शब्दों को अपने लेखन में शामिल करना आवश्यक है। हमें अपनी बात कम से कम शब्दों व रोचकता के साथ श्रोताओं और पाठकों तक पहुंचाने की कला भी आनी चाहिए। इस अवसर पर स्वयं संस्था की ओर से श्रीमती मंजू सक्सेना, श्रीमती कौशल्या, श्रीमती इंदु चावला, दिनेश जोशी, नितिन, श्रीमती शांति, श्रीमती स्नेह, डॉ उमेश चंद्र नैथानी, श्रीमती नेहा, श्रीमती मीना,अभिषेक सिंह, कु. अंशिका एवं अन्य गणमान्य जनों ने भी ऑनलाइन कवि सम्मेलन में भाग लिया।